रजिस्ट्रेशन एवं स्टाम्प विभाग मध्य प्रदेश

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पंजीयन विभाग संपत्ति के संव्यवहारों सें संबंधित विलेखों का पंजीयन करता है, तथा पंजीबद्ध दस्तावेजों की प्रति सुरक्षित रखने की व्यवस्था करता है। दस्तावेजों का पंजीयन रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908 (म.प्र. को लागू हुए रूप में) एवं इनके अन्तर्गत बने नियमों के अधीन किया जाता है, तथा इन पर लगने वाले स्टाम्प शुल्क का नियमन भारतीय स्टाम्प अधिनियम 1899 (म.प्र. को लागू हुए रूप में) एवं इनके अधीन बने नियमों के अंतर्गत होता है।

पंजीयन विभाग में विभागाध्यक्ष महानिरीक्षक पंजीयन के अन्तर्गत चार परिक्षेत्रीय कार्यालय स्थापित है, जो अपने अधीनस्थ 51 जिला पंजीयक कार्यालयों के अधीक्षण एवं नियंत्रण का दायित्व सम्हालते हेै। परिक्षेत्रीय कार्यालय के भारसाधक अधिकारी उप महानिरीक्षक पंजीयन व जिला पंजीयक कार्यालयों के भार साधक अधिकारी व वरिष्ठ जिला पंजीयक/जिला पंजीयक होते है।

जिला पंजीयक कार्यालयों के अधीन प्रदेशभर के 233 उप पंजीयक कार्यालयों है, जिनके भारसाधक अधिकारी व वरिष्ठ उप पंजीयक/उप पंजीयक होते है, व वरिष्ठ उप पंजीयक/उप पंजीयक का दायित्व सम्हालते है।

दस्तावेजों के पंजीयन का प्रयोजन निम्न अपेक्षाओं की पूर्ति करना है:-
01- संपत्ति के हस्तांतरण संबंधी अभिलेख प्रमाणित तौर पर सुरक्षित रखे जाए।
02- मूल दस्तावेज गुम हो जाने, चोरी चले जाने, आग से जल जाने अथवा अन्य कारणों से क्षतिग्रस्त हो जाने पर उस दस्तावेज को प्रमाणित करने के लिए कोर्इ आधार उत्पन्न किया जाए।
03- किसी संपत्ति के हस्तांतरण को प्रमाणित करने के लिये साक्ष्य उपलब्ध कराए जाए।
04- किसी संपत्ति के हस्तांतरणकर्ता द्वारा हस्तांतरण की बात स्वीकार करने के तथ्य को न्यायालय में सिद्ध करने के लिए सरल मार्ग उपलब्ध कराया जाए।
05- किसी संपत्ति के बारे में यदि कोर्इ व्यक्ति यह जानना चाहे कि अन्य व्यक्ति का उस संपत्ति का क्या स्वत्व है, और उसे कहॉ तक मालिकी अधिकार प्राप्त है, इसकी जानकारी उपलब्ध कराने का मार्ग ढूॅंढा जाए।

उप पंजीयक कार्यालयों में दस्तावेजोे के पंजीयन, पंजीबद्ध दस्तावेजो की खोज, तथा उनकी प्रमाणित प्रति प्रदाय एवं भारमुक्ति प्रमाण पत्र जारी करने का कार्य होता है। उप पंजीयक कार्यालयों में वरिष्ठ उप पंजीयक/उप पंजीयक पंजीयन अधिकारी की भूमिका का निर्वाह किया जाता है।

वरिष्ठ उप पंजीयक/उप पंजीयक के कार्यो के अधीक्षण व नियंत्रण का दायित्व संबंधित वरिष्ठ जिला पंजीयक/जिला पंजीयक का होता है, जो अधीनस्थ पंजीयन कार्यालयों की स्थापना/निरीक्षण आदि कार्य संभालते है। जिला पंजीयकों द्वारा स्टाम्प अधिनियम एवं रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के प्रावधानों के अधीन दस्तावेजों पर देय मुद्रांक शुल्क निर्धारण स्टाम्प की वापसी आदि से संबंधित प्रकरणों का निराकरण किया जाता है।

जिला पंजीयक कार्यालयों में वसीयतों का निक्षेप भी किया जाता है। जिला पंजीयक अपने जिले के अंतर्गत कार्य करने वाले मुद्रांक विक्रेताओं एवं दस्तावेज लेखको की अनुज्ञप्ति जारी करने हेतु सक्षम होते है।

अनेक दस्तावेजों पर उनमें वर्णित संपत्ति के बाजार मूल्य पर निर्धारित दर अनुसार स्टाम्प शुल्क व पंजीयन फीस देय होती है। उक्त बाजार मूल्य के निर्धारण हेतु प्रति वर्ष त्रिस्तरीय समितियों के माध्यम से महानिरीक्षक पंजीयन के अनुमोदन पश्चात् जिला कलेक्टर द्वारा गार्इड लार्इन जारी की जाती है। गार्इड लार्इन दरों की जानकारी अवलोकन हेतु मुख्य पृष्ठ पर उपलब्ध है।

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